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फसल से लहलहाते खेत में। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ फसल से लहलहाते खेत में। ϒ फसल से लहलहाते खेत में। बंदूके कहाँ से उग गये। किसानी संस्कृति और परम्परा- जाने कहाँ डूब गये। अब हर तरफ आतंक है। क्या ख़ास और क्या आम। ठिठुरी हुई है जहाँ सुबह। सहमी हुई है जहाँ शाम। कल तक ठहाके लगते जहाँ। कहाँ गये वो खेत …