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फर्क - Difference !! ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Happy Anniversary !! kmsraj51 की कलम से ….. फर्क फर्क आदर्श होना बेहतर है, बस शर्त ये रहे, दोहराए जा रहे आदर्श बल्ली की तरह हों, भीतर और बाहर से एक जैसे, ठोस रुप लिए, जो आदर्श बांस की तरह खोखले और लचर हैं, उनकी नियति में ठठरी की तरह बंधना ही है । पुरुषोत्तम …