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नन्हे बालक की अभिलाषा। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ नन्हे बालक की अभिलाषा। ϒ मैं बालक नन्हा सा। छोटी सी अभिलाषा। कहता हूँ बस बात यही – कभी बनूँ मैं धूप, कभी तो – बन जाऊं मैं छाँव कभी – वर्षा बन खेतों में बरसूं। ग्रीष्म बनूँ तो फल पकवाऊं। फूल बनाओ मुझको गर तो – खिल खिल कर बगिया महकाऊँ। पादप …