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अभी बाकी है
ज़िस्म कट गया तो क्या हुआ, रूह अभी बाकी है तुम्हारी इंसानियत मर गयी तो क्या, हमारी अभी बाकी है छाया दूंगा , पानी दूंगा गर मैं मुक्कमल खड़ा रहूंगा शाख ओ दरख़्त न रहे सही पर फसल अभी भी बाकी है। काट डाले…