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लोकतंत्र का अंतिम क्षण
कैमरा बार बार जा कर उसी क्षण पर टिकता था.मेरी बेटी ने विचलित होकर कहा, “चैनल बदल दो, अच्छा नहीं लग रहा.” लेकिन चैनल उस थप्पड़ की आवाज़ न सुना पाने की लाचारी की भरपाई उस दृश्य को दुहरा-दुहरा कर कर रहे…