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roj aankhon se tu ho to barasti hai – रोज आंखों से तू ही तो बरसती है
मेरे आंसुओं में तू ही छुपी रहती है रोज आंखों से तू ही तो बरसती है किसी गुलाब की बेटी है तू शायद इसलिए मुरझाकर भी महकती है Mere Aansuon Me Tu Hi Chhupi Rahti Hai Roj Aankhon Se Tu Hi To Barasti Ha…