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मोम से ये वजूद मेरा बहुत जल्दी पिघलता है
आग बुझाने की कोशिश में सांस हम लेते रहे सीने में उठते धुएं से कतरा कतरा जल चुके मोम से ये वजूद मेरा बहुत जल्दी पिघलता है दुख के इतने सांचों में अब तक हम ढल चुके – शायरी…