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ईमेज शायरी – कैसा सफर है ये जिसे नसीब नहीं हमसफर
चांद को तुम सा अब कभी न मैं कह पाऊंगा जबसे तुम छोड़ गए, ये चिराग हम बुझा चुके कैसा सफर है ये जिसे नसीब नहीं हमसफर इस जिंदगी की राह में हम दर्द को बिछा चुके…