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ईमेज शायरी – गमजदा तेरी सूरत पे खौफ का जो मंजर है
उफ्फ कितनी बेचैनियां हैं तेरी इन निगाहों में तेरे जुबां खामोश खत हैं, क्या लिखा है आहों में गमजदा तेरी सूरत पे खौफ का जो मंजर है चांद डूब रहा हो जैसे गर्दिश की पनाहों में…