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शायरी – दिल जो टूटे तो कोई जख्म न जुबां पे लाए
दिल जो टूटे तो कोई जख्म न जुबां पे लाए कैसे फिर कोई उनके गम को समझ पाए एक खुलते ही कई और गांठ लग जाते हैं दिल के धागे भी उलझकर न सुलझ पाए…