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शायरी – न आंखों को चैन न जिगर को करार आया
शायरी न आंखों को चैन न जिगर को करार आया मेरे हिस्से मोहब्बत में बस इंतजार आया वो मिल न सकी फिर भी उससे मिलते रहे खयालों में उसपे में सबकुछ निसार आया…