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शायरी – एक नदी की चाहत तो उस रेगिस्तां को भी है
शायरी समंदर से प्यार करना कोई नदी छोड़ पाती नहीं रेगिस्तां की तरफ भूलकर भी कभी वो जाती नहीं एक नदी की चाहत तो उस रेगिस्तां को भी है मगर प्यासे की प्यास कोई भी बुझाती नहीं…