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शायरी – हम मुस्कुराते हुए जख्म खाते गए
शायरी वो सितम पे सितम मुझपे ढाते गए हम मुस्कुराते हुए जख्म खाते गए जिनकी खुशियों की खातिर मरते रहे वो रिश्ते नाते ही दिल को रुलाते गए…