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शायरी – दुनिया की भीड़ में तुझे याद कर सकूं कुछ पल
दिल की चंद धड़कनों को रोज बटोरता हूं मैं उम्र की कुछ कतरनों को रोज जोड़ता हूं मैं तेरे दर्द की गर्मी भी जिसे पिघला नहीं पाती उन बर्फीले जख्मों को अब रोज तोड़ता हूं मैं…