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शायरी – इन जख्मों को भरने में लगेंगे कई मौसम
इन जख्मों को भरने में लगेंगे कई मौसम अभी तुमको भूलने में लगेंगे कई मौसम तेरे इश्क में ये बहार एक पल में उजड़ गई अब फूलों को खिलने में लगेंगे कई मौसम…