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शायरी – तूने आशिकी में मेरे दिल के टुकड़े किए
शायरी जख्मे-दिल सीने में दरिया सा बहता है मेरे खूने-जिगर में तेरा खंजर रहता है तूने आशिकी में मेरे दिल के टुकड़े किए तेरा जाना मुझे शीशे की तरह चुभता है…