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आरजू शायरी- दो निगाहों को रुला बैठी
शायरी दो निगाहों को रुला बैठी आरजू इस कदर मुस्कुरा बैठी जब कभी नींद आई थी हमको रातभर मुझको तू जगा बैठी…