jazbat.com
मुहब्बत की शायरी- तू मेरे जख्म पे न आंसू बहा
मेरी दुनिया में जो उजाले हैं अब तेरे बिन बुझने वाले हैं तू मेरे जख्म पे न आंसू बहा चांद के सीने पे भी छाले हैं खाक कर दे मुझे, जला दे अब हम तेरे हुस्न के हवाले हैं लग गई है मुझे तुम्हारी नजर देख ले…