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शायरी- खामोशियों को जो पढ़ता नहीं है
शायरी कहने से कोई समझता नहीं है जब तक तजरबा होता नहीं है बातें ही करता रहता है अक्सर खामोशियों को जो पढ़ता नहीं है…