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शायरी – कभी नाम तेरा लबों पर जो आया
कभी नाम तेरा लबों पर जो आया खुदा जाने मैं क्यों जरा मुस्कुराया घर से मैं नजरें झुकाए चला था तेरी गली में ही ये सर था उठाया…