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शायरी – रोज मिलते हैं जो उनको ये खबर ही नहीं
जाने कितनी बेवफाओं की कहानी से गुजरे इस तरह ठोकरें खाते हम जवानी से गुजरे रोज मिलते हैं जो उनको ये खबर ही नहीं कि उनको देखकर किस परेशानी से गुजरे…