jazbat.com
शायरी – जो फूल उसकी जुल्फों तक नहीं पहुंच सका
मुहब्बत के मुकद्दर में वो हसीं शाम कभी होती सोचता हूं ये जिंदगी तो उसके नाम कभी होती जो फूल उसकी जुल्फों तक नहीं पहुंच सका उसे तोड़ने को वो दिल से परेशान कभी होती…