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शायरी – हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत
हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत ऐसे में दिल-ए-आशिक कैसे रहे सलामत एक बूंद दर्द में डूबा, तब बन गया समंदर किसी बेवफा ने की थी उसपे कभी इनायत…