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शायरी – मुहब्बत में जलती हुई एक शाम देखता हूं
बहुत देर तक अक्सर आसमान देखता हूं मैं उस चांद में सनम का पैगाम देखता हूं बादल गुजरता है जिधर टुकड़ों में तड़पकर उस तरफ दूर तक तेरे अरमान देखता हूं…