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शायरी – एक गुमसुम सी फूल के खातिर मैं कांटों पे सोया
शायरी प्यासी निगाहें बरस गई, बरसी निगाहें तरस गई सावन की आई बारिश में कितनी नदियां टूट गई मेरे सागर में एक कश्ती तूफानों से डरती थी सैलाबों से लड़ते-लड़ते वो भी एक दिन डूब गई…