jazbat.com
शायरी – हर आदमी में वफा हो ऐसा हो नहीं सकता
शायरी हर आदमी में वफा हो ऐसा हो नहीं सकता गुलशन का हरेक फूल खुशबू दे नहीं सकता तुम मुझसे मुखातिब हो ऐसे क्यूं देखते हो क्या मेरे सिवा तुमको कुछ और नहीं दिखता…