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शायरी – मुहब्बत की हिफाजत मैं करना जानता हूं
शायरी मैं अपनी राह को भी नहीं पहचानता हूं किसी मंजिल पे जाके न रुकना जानता हूं सुना ले तू भी अपने दिल की कोई कहानी फकत दिल की जुबां ही मैं सुनना जानता हूं…