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शायरी – आह ये मुरझाया गुलाब जाने कब खिलेगा
दिल को छूने वाली शायरी आह ये मुरझाया गुलाब जाने कब खिलेगा कब इसमें लाल रंग का खूने-इश्क बहेगा तोड़ा है जमाने ने जिस शाख से इसको जाने कब उन बाहों का फिर साथ मिलेगा…