jazbat.com
शायरी – वहीं मिल जाएगी एक दरिया उसे रोती हुई
शायरी अभी बरसात है, कभी रुकती कभी गिरती हुई और एक शाम है भीगी हुई सी ढलती हुई कौन जाने कि ये घटाएं कहां तक जाएंगी जाने किस मोड़ पे बेवफा होगी हवा चलती हुई…