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शायरी – मैं क्यूँ भटक रहा हूँ, ये किसकी तलाश है
मैं क्यूँ भटक रहा हूँ, ये किसकी तलाश है तेरी तलाश है मुझे या खुद की तलाश है शहर के जंगल में बचे हैं महलों के बरगद बेघर हुए पंछी को एक शाख की तलाश है…