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शायरी – जो आए थे हमें तन्हा छोड़ जाने के लिए
कितने वादे किए थे उसने निभाने के लिए जो आए थे हमें तन्हा छोड़ जाने के लिए जो सहारा बने थे मेरे घर के आईनों के वो दीवारें टूट गई शीशे को तोड़ने के लिए तिनके उड़ गए पल भर में इक झोंके से कितने जत…