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शायरी – खुद में ही तुम उलझी हो, मुझको क्या सुलझाओगी
भूल नहीं पाते हैं तुमको, कितने भी मैं कर लूं जतन तेरी ख्वाहिश मिट नहीं पाती, यादों में तुम हो सनम आज अगर तुम मिल जाओगे, कैसे अपनाएंगे तुमको कोई खुशी न दे पाएंगे, दूर तलक है गम ही गम जीना भी था …