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शायरी – इन बेदिलों की भीड़ में, हम खोजते थे दिल कहीं
एक ख्वाब जो टूटा कहीं, फिर नींद न मिल पायी थी हम रातभर यूं जागे थे कि आँख खुल न पायी थी तिनको को लब पे बांधकर हम चल पड़े थे शाख पर घर तो कई हैं बना चुके, बुलबुल ही न मिल पायी थी रोकर ही हम हंसत…