jazbat.com
शायरी – छुप सकी है क्या कोई हु्स्न किसी शायर से
मैं अपनी आह में जिंदा हूं एक मुद्दत से मुझे मिला है बस दर्द अपनी किस्मत से पी लिया जहर मगर जान बच गयी थी मेरी गम ही बस दिल में रहे, मौत न हुई मुद्दत से एक तमन्ना है जिसे गाके, सुनाऊंगा तुझे ये …