jazbat.com
शायरी – जगती रातों में तू मेरे अंदर कहीं पे रहती है
शायरी महकी सांसें, दुखता सीना, रोती आंखें कहती है जगती रातों में तू मेरे अंदर कहीं पे रहती है दरिया के आंसू में डूबा एक चिराग बुझ गया लेकिन दिल में डूबके भी तेरी शम्मा जलती है…