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शायरी – सर उठाओ मेरे महबूब कि मेरा चांद निकले
शायरी आज खो बैठे हो क्यूं अपनी पहली सी नजर कैसा गम है जिसमें बदली है गहरी सी नजर मेरी आंखों में जरा देखो तो मैं भी देखूं क्यूं भला अश्क में डूबी है ठहरी सी नजर…