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शायरी – होठों से तू हंसती है, आंखो से तू रोती है
सूरत पे हर इक पल में दो प्यास उभरती है होठों से तू हंसती है, आंखों से तू रोती है शम्मे न जला तू अभी, रहने दे अंधेरे को तू रात के पहलू में एक चांद सी लगती है…