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शायरी – हर दर से ठुकराया गया जिस्म हूं मैं
हम तेरी मुहब्बत के काबिल न रहे अब मेरे पास बस एक दर्दे दिल ही रहे हर दर से ठुकराया गया जिस्म हूं मैं अपनी मैयत पे हर बार तन्हा ही रहे…