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शायरी – सितम के निशां पड़े हैं दिल के बदन पर
अपनी तकदीर पे हमको बदगुमां है मेरा कातिल ही अब मेरा रहनुमा है बड़ी रंगीन है दुनिया की महफिल बस हमारे घर में उदासी का शमा है…