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शायरी – हुस्न में शोखी है और खामोशी भी
मौत ही मयस्सर है जब आखिर के लिए फिर खुदा क्या चीज है किसी काफिर के लिए असलियत जानता है खूबसूरत चेहरों की आईना टूट गया है जिस मुसाफिर के लिए…