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शायरी – ऐ हुस्न तेरे दर्द में क्या-क्या न किए
शायरी न बस्ती के रहे, न ही तेरे आशियां के रहे ऐ हुस्न तेरे इश्क में हम अब कहीं के न रहे कुछ रूह में जलता है, दिल में सुलगता है बन सके न मेहताब तो हम चिराग ही रहे…