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शायरी – जो सजा देती हैं, वो यादें ले जाओ
शायरी इल्तजा है मेरी, तुम ये आहें ले जाओ जो सजा देती हैं, वो यादें ले जाओ मेंहदी रचाना है तुझे अपने बदन पर आकर मेरे जिगर का खून ले जाओ…