jazbat.com
शायरी – कोई इल्जाम न लेगी वो अपने सर पे | shayari-love shayari-hindi shayari
कोई इल्जाम न लेगी वो अपने सर पे सांस टूटी है मुसाफिर की जिसके दर पे जो मरासिम पे मरने की वफा रखते थे जल गए वो ही शम्मा में आहें भर के महफिलों में जो दिखाती है अपने जलवे एक तन्हा को ढूंढती है हुस्न …