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शायरी – दर्द है सीने में और जिस्म में तन्हाई है
शायरी गम से याराना नहीं, गम से आशनाई है दर्द है सीने में और जिस्म में तन्हाई है एक सुरीली सी हवा तेरे दर पे ले आई क्या खबर थी कि ये हिज्र की शहनाई है…