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शायरी – दीवानगी में न जाने कल कहां पे रहूँगा
शायरी ये दिल किसी मुकाम पर ठहर न सका मीलों तलक चला मगर मंजिल पा न सका दीवानगी में न जाने कल कहां पे रहूंगा आवारगी में अपना घर भी बना न सका…