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शायरी – कांटें मिले हैं जिसको उसे मैं दिलजला लिखूं
शायरी इस दर्द की तारीफ में अब क्या गिला लिखूं दिन-रात के फिराक का क्या सिला लिखूं बस्ती में खिला फूल भी बस्ती का हो चुका कांटें मिले हैं जिसको उसे दिलजला लिखूं…