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शायरी – मैं किसी की ख्वाहिशों का गुलाम नहीं
शायरी मैं किसी की ख्वाहिशों का गुलाम नहीं मेरी आजादी का लेना कभी इम्तहान नहीं दिल भले ही मुहब्बत के लिए रोता है मगर हमने लिया कभी तेरा अहसान नहीं…