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शायरी – जिंदगी मेरी मुहब्बत की जुदाई में कटी
शायरी न बुराई में कटी, न भलाई में कटी जिंदगी मेरी मुहब्बत की जुदाई में कटी फासलों से ही आंखों से उनको देखा कीए यूं ही कुछ माह निगाहों की लड़ाई में कटी…