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शायरी – थे करीब हम-तुम लेकिन बंदिशें थी बेहिसाब
शायरी क्यूं है सर्द-सर्द चांद, क्यूं है जलता आफताब क्यूं हैं ये खामोश तन्हा, कौन दे इसका जवाब कुछ दिनों तक लिख न पाया मैं कोई भी गजल उन दिनों मैं भूल गया करना जख्मों का हिसाब…