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शायरी – अच्छा किया जो मुझपे ये गुलाब रख दिया
शायरी रोते हैं वो रुखसती पे जब मैं नहीं रहा अब पास वो बैठे हैं जब मैं नहीं रहा अच्छा किया जो मुझपे ये गुलाब रख दिया लो कर लिया कुबूल जब मैं नहीं रहा…